रायपुर कमिश्नरेट पुलिस के पश्चिम जोन ने जनसुरक्षा और यातायात जागरूकता को लेकर व्यापक अभियान चलाया। स्कूलों, बस्तियों और सार्वजनिक स्थलों पर विद्यार्थियों, अभिभावकों और नागरिकों को सड़क सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव, महिला एवं बाल सुरक्षा, नशामुक्ति और पुलिस सहायता सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
रायपुर, CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) 01 अगस्त। बदलते समय के साथ अपराधों के स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है। सड़क दुर्घटनाओं से लेकर साइबर ठगी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा जैसे विषय आज समाज के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। ऐसे में केवल कानून लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ रायपुर कमिश्नरेट पुलिस के पश्चिम जोन ने जनसुरक्षा, यातायात जागरूकता और पुलिस-जन संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया।
इस अभियान के माध्यम से पुलिस अधिकारियों ने शहर के विभिन्न स्कूलों, सार्वजनिक स्थलों, कॉलोनियों और बस्तियों में पहुंचकर विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा आम नागरिकों से सीधा संवाद किया। कार्यक्रमों में सड़क सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव, महिला एवं बाल सुरक्षा, नशामुक्ति, पुलिस सहायता सेवाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चला अभियान
यह विशेष अभियान पुलिस उपायुक्त (पश्चिम क्षेत्र) रॉबिन्सन गुरिया के निर्देश पर संचालित किया गया। अभियान का संचालन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राहुल देव शर्मा तथा संबंधित सहायक पुलिस आयुक्तों के मार्गदर्शन में किया गया।
पश्चिम जोन के अंतर्गत आने वाले आमानाका, पुरानी बस्ती, डीडी नगर, आजाद चौक, सरस्वती नगर, कबीर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, मुजगहन और टिकरापारा थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
स्कूलों में विद्यार्थियों को बताया सड़क सुरक्षा का महत्व
अभियान का प्रमुख उद्देश्य बच्चों और युवाओं में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। पुलिस अधिकारियों ने विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को सड़क पर सुरक्षित तरीके से चलने और यातायात नियमों का पालन करने के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।
छात्रों को बताया गया कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। इसी तरह चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का उपयोग दुर्घटना की स्थिति में गंभीर चोटों से बचा सकता है।
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं नियमों का पालन करें और अपने परिवार तथा मित्रों को भी ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें।
नाबालिग वाहन चालकों पर विशेष फोकस
हाल के वर्षों में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने इस अभियान में विशेष रूप से अभिभावकों को जागरूक किया।
पुलिस अधिकारियों ने नाबालिग वाहन चालकों और उनके अभिभावकों से मोबाइल के माध्यम से संपर्क कर समझाइश दी कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति न दें।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नाबालिग द्वारा वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है और इससे न केवल बच्चे का जीवन खतरे में पड़ता है बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
साइबर अपराध से बचाव के बताए आसान उपाय
डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी ठगी, फर्जी लिंक, सोशल मीडिया हैकिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर धोखाधड़ी जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों और नागरिकों को साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय बताए। लोगों से अपील की गई कि—
- किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी साझा न करें।
- बैंक संबंधी जानकारी किसी को न दें।
- संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- सोशल मीडिया अकाउंट में मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें।
- किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन और पुलिस से संपर्क करें।
अधिकारियों ने कहा कि थोड़ी सी सतर्कता बड़ी आर्थिक और मानसिक हानि से बचा सकती है।
महिला एवं बाल सुरक्षा पर भी दिया गया विशेष संदेश

अभियान के दौरान महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर भी व्यापक जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया।
छात्राओं और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, हेल्पलाइन सेवाओं तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, हिंसा या उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।
बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी सरल भाषा में समझाई गई ताकि वे किसी भी संदिग्ध स्थिति की पहचान कर सकें और समय रहते अपने अभिभावकों या शिक्षकों को इसकी जानकारी दें।
नशामुक्त समाज के निर्माण का दिया संदेश
कार्यक्रमों के दौरान युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में भी जागरूक किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शराब, तंबाकू और अन्य मादक पदार्थ न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि परिवार और समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। युवाओं से अपील की गई कि वे नशे से दूर रहकर शिक्षा, खेल और सकारात्मक गतिविधियों में अपनी ऊर्जा लगाएं।
‘संवाद से समाधान’ अभियान बना लोगों और पुलिस के बीच भरोसे का माध्यम
रायपुर पुलिस द्वारा संचालित ‘संवाद से समाधान’ अभियान के तहत भी विभिन्न क्षेत्रों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।
थाना आमानाका क्षेत्र के बीएसयूपी कॉलोनी और आमानाका बस्ती सहित सरस्वती नगर थाना क्षेत्र की समता कॉलोनी फेस-2 तथा कोटा स्थित नॉलेज जैन लाइब्रेरी में पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों और विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया।
इस दौरान लोगों ने अपने क्षेत्र की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, असामाजिक गतिविधियों और अन्य स्थानीय समस्याओं से जुड़े सुझाव भी पुलिस अधिकारियों के सामने रखे। अधिकारियों ने इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करने और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
जनभागीदारी से ही बनेगा सुरक्षित समाज
विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध नियंत्रण केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है। रायपुर पुलिस का यह अभियान इसी सोच को मजबूत करता है कि जब नागरिक जागरूक होंगे, नियमों का पालन करेंगे और पुलिस के साथ सहयोग करेंगे, तभी सुरक्षित और जिम्मेदार समाज का निर्माण संभव होगा।
यातायात नियमों का पालन, साइबर अपराधों के प्रति सतर्कता, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता तथा नशामुक्त जीवनशैली जैसे विषय केवल कानून तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी भी हैं।
रायपुर कमिश्नरेट पुलिस का यह जनजागरूकता अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। स्कूलों, बस्तियों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर सीधे संवाद करने की यह रणनीति लोगों को पुलिस के करीब लाने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक कर रही है।
यदि ऐसे अभियान नियमित रूप से जारी रहते हैं और नागरिक भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं, तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी, साइबर अपराधों पर रोक, महिला एवं बाल सुरक्षा में सुधार तथा अपराध नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। यह पहल पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने के साथ एक सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

