राजनांदगांव के सोमनी क्षेत्र के झूराडबरी में प्रशासन ने 32.97 एकड़ सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाते हुए अवैध प्लॉटिंग, रिसॉर्ट निर्माण की तैयारी और नालों पर बनाई गई सड़क को बुलडोजर से ध्वस्त किया। पढ़िए पूरी खबर।
छत्तीसगढ़ CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) के राजनांदगांव जिले में सरकारी जमीन पर कब्जा और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 32.97 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया। यह कार्रवाई जिले के सोमनी क्षेत्र अंतर्गत झूराडबरी में की गई, जहां लंबे समय से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर प्लॉटिंग और रिसॉर्ट विकसित किए जाने की तैयारी चल रही थी। प्रशासन ने मौके पर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण, कच्चे रास्ते और नालों पर किए गए अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई को जिले में सरकारी भूमि संरक्षण और अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण या कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
जानकारी के अनुसार, प्रशासन को शिकायत मिली थी कि झूराडबरी क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कब्जा कर बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। इतना ही नहीं, इस भूमि पर निजी रिसॉर्ट विकसित करने की भी तैयारी चल रही थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए राजस्व विभाग की टीम ने रिकॉर्ड का परीक्षण किया और मौके का निरीक्षण किया।
जांच में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाए जाने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया। इसके बाद एसडीएम गौतम पाटिल के नेतृत्व में राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल और मशीनों के साथ मौके पर पहुंची।
32.97 एकड़ सरकारी भूमि कराई गई अतिक्रमण मुक्त

प्रशासनिक जांच में सामने आया कि करीब 32.97 एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर प्लॉटिंग की तैयारी की जा रही थी। इस क्षेत्र में भूमि का स्वरूप बदलने के लिए कई स्थानों पर समतलीकरण भी किया गया था। प्रशासन ने मौके पर बुलडोजर की मदद से सभी अवैध संरचनाओं और निर्माण कार्यों को हटाते हुए पूरी सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।
अधिकारियों के अनुसार, यह भूमि पूरी तरह शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज है और इस पर किसी भी निजी व्यक्ति का स्वामित्व नहीं है। इसलिए कब्जा हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की गई।
पहाड़ काटकर बनाया गया था कच्चा रास्ता
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने पाया कि करीब 32 एकड़ क्षेत्र में पहाड़ को काटकर कच्चा रास्ता तैयार किया गया था, जिससे प्रस्तावित प्लॉटिंग क्षेत्र तक पहुंच आसान बनाई जा सके। प्रशासन ने इस रास्ते को भी अवैध मानते हुए बुलडोजर से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिक भू-भाग में बिना अनुमति परिवर्तन करना और सरकारी भूमि का व्यावसायिक उपयोग करने की तैयारी करना गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
शासकीय नालों पर बना दी गई थी सड़क
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खसरा नंबर 563/1, 563/2 और 563/3 के सामने स्थित शासकीय नालों को पाटकर अवैध सड़क बना दी गई थी। इससे प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी।
प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बुलडोजर की मदद से इस अवैध सड़क को भी हटवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि नालों पर अतिक्रमण न केवल सरकारी संपत्ति का उल्लंघन है, बल्कि इससे बरसात के दौरान जलभराव और पर्यावरणीय समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
राजस्व और प्रशासनिक टीम रही मौजूद
पूरी कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय अमले की संयुक्त टीम मौके पर मौजूद रही। कार्रवाई को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से पूरा किया गया। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र का सीमांकन कर सरकारी भूमि को पुनः अपने कब्जे में ले लिया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि इस भूमि पर दोबारा अतिक्रमण या अवैध निर्माण का प्रयास किया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
अवैध प्लॉटिंग पर लगातार सख्ती
पिछले कुछ समय से प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवैध प्लॉटिंग और सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। ऐसे मामलों में प्रशासन अब अधिक सतर्क नजर आ रहा है। बिना वैधानिक अनुमति के प्लॉट काटना, सरकारी भूमि का व्यावसायिक उपयोग करना या प्राकृतिक संसाधनों में बदलाव करना कानून का उल्लंघन माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से न केवल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा होती है, बल्कि आम लोगों को भी अवैध प्लॉट खरीदने जैसी संभावित धोखाधड़ी से बचाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने कार्रवाई का किया स्वागत
क्षेत्र के कई लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और प्लॉटिंग की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं। समय रहते कार्रवाई होने से सरकारी संपत्ति सुरक्षित हुई है और भविष्य में ऐसे मामलों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि यदि अवैध प्लॉटिंग समय रहते नहीं रोकी जाती, तो बाद में जमीन विवाद, मूलभूत सुविधाओं की कमी और कानूनी विवाद जैसी समस्याएं सामने आ सकती थीं।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
इस कार्रवाई के माध्यम से जिला प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, अवैध प्लॉटिंग या बिना अनुमति निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी भूमि की खरीद-फरोख्त से पहले उसके राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व और वैधानिक अनुमति की पूरी जांच अवश्य करें।
प्रशासन ने यह भी कहा कि यदि कहीं भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, प्लॉटिंग या निर्माण की जानकारी मिलती है तो नागरिक इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

